Thursday, March 3, 2011
एकं सर्वगतं व्योम बहिरन्तर्यथा घटे ।नित्यं निरन्तरं ब्रह्म सर्वभूतगणे तथा ॥
जिस प्रकार एक ही आकाश पात्र के भीतर और बाहर व्याप्त है, उसी प्रकार शाश्वत और सतत परमात्मा समस्त प्राणियों में विद्यमान है ।।
Just as the same space exists both inside and outside a jar, the eternal, continuous God exists in all.
एक शून्य है भीतर बाहर, आँख खोल कर देख ज़रा ,मिटटी की दीवार गिरी बस, कौन जिया और कौन मरा ?
Subscribe to:
Comments (Atom)
