Saturday, September 1, 2012

 आधुनिक प्रेम ....

प्यार के इस शोर में बस प्यार खो गया ,
मतलब के मिले दोस्त मगर यार खो गया ....

क्यूँ कहने लगे प्यार हम इस लेन देन को ,
झूठी अकड़ में काहे खोया दिल के चैन को
अपनत्व जाने कैसे  पीठ मोड़ सो गया ,
प्यार के इस शोर में बस प्यार खो गया ,

कैसी ये घड़ी आई , सब नवीनता  गई ,
आडम्बरों से घिर , सारी सहजता गई ,
पुनरुक्तियों की वेदी पर निजत्व खो गया
प्यार के इस शोर में बस प्यार खो गया ,

अपने ही हाथ पाँव काट क्षुद्रता चुनी ,
शालीनता को त्याग, अभद्रता गुनी ,
विराट से विमुख  ह्रदय विदीर्ण  हो गया ,
प्यार के इस शोर में बस  प्यार खो गया ,

तुझसे भी करूं बात शब्द तोल तोल के ,
अश्रद्धा विष का पान करूं घोल घोल के ,
मेरे राम हाथ थाम अब बोहोत हो गया  ,
प्यार के इस शोर में बस प्यार खो गया ,