क्षण भंगुरता अस्तित्व का स्वभाव है। जीवन प्रतिक्षण नए रूप में प्रगट होता रहता है। इसी वैविध्य के कारण जीवन इतना सुन्दर भी है। तो फिर समस्या क्या है? समस्या हमारे मन में है। हमारा मन status quo चाहता है ,और यहीं हम अपनी पीड़ा का सामान तैयार कर लेते हैं। मन यथास्थिति क्यूँ बनाये रखना चाहता है? क्यूंकि हमें लगता है कि यथास्थिति में सुरक्षा है। मनुष्य जीवन कि सबसे बड़ी भ्रांतियों में से यह एक है। यथास्थिति सिर्फ एक प्रकार कि मृत्यु है। हम बार बार उन्ही विचारों से घिरे हुए एक असत्य जीवन का निर्माण कर लेते हैं जो हमें एक भंवर के समान अपने अन्दर खींच लेता है।
यह मनुष्य जीवन के सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि जिस जीवन को प्रति क्षण नई सृजनात्मकता में बिताया जा सकता था, वो जीवन मात्र मृत्यु कि एक उबाऊ प्रतीक्षा बन के रह जाता है।
तो अब की बार जब मन हमें रोके तो रुकें नहीं। अज्ञात की और छलांग लें ! अस्तित्व पे भरोसा रखें ! जिसने जीवन दिया है वही सम्हालेगा भी।
Saturday, January 2, 2010
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