अजीब शहर है ये , अजब बस्ती , लोग अपना पता भी दूसरों से पूछते हैं ॥
माँ बाप अजनबी हैं , बेटे बेटी पराये, अहम् के चश्मे चढ़ा ममत्व ढूंढते हैं ॥
बेहेन भाई सशंकित, हुए रिश्ते कलंकित, दोस्ती में भी सब स्वार्थ तोलते हैं॥
ये बेदर्द हाकिम,हर चाल इनकी ज़ालिम,हम इनके सहारे सफीने खोलते हैं ?
ये अधकचरे ग्यानी, ये खोई सी वाणी, हम इनके भरोसे आत्मा छोड़ते हैं ?
भेड़ों की टोली से काट खुद को 'ओमी', सिंहों के शावक तो अकेले डोलते हैं ॥