Saturday, October 2, 2010

सर पर ढेरों धूल जमी है .भागो ! टखने टखने आग बिछी है , भागो !


बंद है कारोबार, दुकानें खाली ! और सड़कों पर भीड़ लगी है , भागो !


मंजिल है दो चार कदम की दूरी पर ! और आगे दीवाल खड़ी है ,भागो !


धरती का दिल काँप रहा है शायद, घर घर हाहाकार मची है ,भागो !

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