Tuesday, October 12, 2010

सूखे दुखे समेकृत्वा, लाभालाभो जया जयो !
ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापं वाप्स्यामी ॥
सुख दुःख, लाभ हानि , जय पराजय को सामान समझ कर...युद्ध के लिए तैयार हो अर्जुन ! इस प्रकार युद्ध करने से तू पाप को प्राप्त नहीं होगा !

No comments:

Post a Comment