सूखे दुखे समेकृत्वा, लाभालाभो जया जयो !
ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापं वाप्स्यामी ॥
सुख दुःख, लाभ हानि , जय पराजय को सामान समझ कर...युद्ध के लिए तैयार हो अर्जुन ! इस प्रकार युद्ध करने से तू पाप को प्राप्त नहीं होगा !
Tuesday, October 12, 2010
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