यदि मैं शून्य हूँ और तुम भी शून्यतोशब्दों का क्या प्रयोजन?...
क्यूंकि शब्द अब भी रिझाते हैं ... निःशब्द की भाषा से पहचान कहाँ ?
अहंकार के वर्तुल से आसक्त .... शून्य मात्र शब्द है , संधान कहाँ ?
Wednesday, November 3, 2010
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