Monday, November 1, 2010

बूंद की पूर्ण पारदर्शिता में निहित है
इन्द्रधनुष का अपव्यय
गुज़रता है प्रकाश मध्य से
विखंडित होता अनगिनत रंगों में
प्रत्येक रंग के पीछे है पारदर्शिता
प्रच्छन्न अपनी ही प्रांजलता से !

2 comments:

  1. सही कहा। खुशी है कि एक और हमराही मिला जो इस पारदर्शिता को महसूस कर सकता है, देख सकता है।

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  2. बसंत जी , आपका प्रत्युत्तर पा कर आनंदित हूँ ! उपर्युक्त पंक्तियाँ मेरी लिखी नहीं हैं ... मित्र परीक्षित से ली हैं ... बूँद की पारदर्शिता देखने का सामर्थ्य मुझ जैसे अदने व्यक्ति में कहाँ ?

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