Sunday, April 25, 2010
अच्छा ही है कि परमात्मा हमें नहीं मिलता। हम उसके लिए तैयार ही नहीं हैं। यूँ समझो , हम एक चाय की प्याली हैं, ओर उस पे केतली उड़ेल दो । क्या होगा? व्यर्थ का बिखराव ! हमारी चेतना के छोटे से दिए से परम की विराट ऊर्जा प्रगट नहीं होती , यह अच्छा ही है।हम जैसे हैं ,परम को handle ही नहीं कर सकते। जिस दिन हम बुलंद हो जायेंगे, परमात्मा हमें स्वयं से भर देगा। बुद्ध , कृष्ण , कबीर, नानक , फरीद, बुल्ले शाह, ....जाने कितने लोग हैं ....ऐसे बुलंद लोग जिनसे परमात्मा को पूछना ही पड़ा कि उनकी रजामंदी किस में है ! पर , पात्रता चाहिए ! पहले खुद की दृष्टि को निखारना होगा, तब परम से कोई बातचीत हो सकती है।
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