एको विशुद्ध बोधोहमिति निश्चय्वान्हिना ।
प्रज्वाल्या ज्ञानगहनं वीतशोकः सुखी भव ॥
मैं एक अति शुद्ध बुद्ध रूप हूँ। ऐसे निश्चय रुपी अग्नि से अज्ञानरूपी वन को जला कर शोक रहित हुआ ,तू सुखी हो !
Sunday, August 1, 2010
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