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India and the inner quest
Friday, August 20, 2010
मीरा ने गाया है ... आये मोरे सजना ,फिर गए अंगना , मैं रही अभागिन सोय री ... मैं जान्यो नाहिं हरि सों मिलन कैसे होय री... संतों ने तो स्पष्ट राह दिखाई है ... हम ही आंखें बंद करे पागलों की दौड़ मैं भागे जा रहे हैं !
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