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India and the inner quest
Friday, August 20, 2010
मेरो कछु ना बिगरैगो मोहन, लाज तिहारी जाएगी !
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मौन ही सघन होते होते परमात्मा बन जाता है !
गधा ! ग = गंभीर , धा = धार्मिक । जो धर्म को अति ग...
काम के विरोध में राम नहीं मिलेंगे ... काम के पार र...
राम नाम की लूट है, लूटि सके तो लूट ! जिस धरा से भ...
मीरा ने गाया है ... आये मोरे सजना ,फिर गए अंगना , ...
परमात्मा तो अभी और यहीं है ... बस हम ही नहीं हैं ...
मेरो कछु ना बिगरैगो मोहन, लाज तिहारी जाएगी !
परमात्मा को हम खोजेंगे कैसे ? प्रत्येक खोज सिर्फ ...
चालबाजी नहीं समर्पण !
आस्तिकों की इस दुनिया में इतना पाप ? इतना व्यभिचार...
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यूँ पुकारे हैं मुझे, कूचा -ए-जानां वाले, इधर आ बे,...
नैतिकता या आध्यात्म ?
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