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India and the inner quest
Saturday, May 15, 2010
अहिंसा परमो धर्मः ,हिंसा आपद धर्मः ।
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नयन जो सतत ढाढस बंधाते मुस्कुराते थे, वे तीक्ष्ण च...
फिर मिली जब आँख, पुनः सम्बन्ध जुड़ा, बिखरते बादल इ...
आकाश्वदंतोहम घटावात्प्रक्रितम जगत । इति ज्ञानम् तथ...
पिता के कांपते हाथ देख के सिहर गया , वोह ममता की ठ...
दैर- ओ -हरम भी मंजिल-ए-जानां में आये थे, शुक्र है ...
अम्बा किम गोत्रोहम अस्मि ? मेरा गोत्र क्या है माँ ?
आम आदमी को सत्य समझ में नहीं आता, स्वार्थ समझ में ...
(कु) जाति प्रथा ! एक कदम अन्धकार छान्दोग्योपनिषद म...
हंसा विरद सम्हाल ले, चुगे तो मोती चुग्ग,नितर करना ...
दश्त-ए-तन्हाई-ए-सेहरा में खड़ा सोचता हूँ, हाय, क्या...
हंसीबा, खेलीबा, धरीबा ध्यानम । हंसो , खेलो, और ध्य...
आदमी का हयात कुछ भी नहीं, बात ये है कि बात कुछ भी ...
या रब, किसी के राज़-ए-मोहोब्बत की खैर हो ,दस्त-ए-ज...
ना था कुछ तो खुदा था, कुछ ना होता तो खुदा होता,डुब...
महाभारत से एक बोध कथा। एक पंडित और उसका मित्र एक स...
अज्ञानी तो अंधकार में भटकता ही है, ग्यानी महान्धक...
दर्द इतना था कि ज़ख्मों से गवाही ना हुई,तेरे आने प...
नज़र में ढल के उभरते हैं दिल के अफ़साने,ये ...
सुनी दसकंधर वचन तब, कुम्भ्करन बिलखान , जगदम्बा हर...
वचन कर्म मन कपट तजि ,भजेहु राम रघुबीर।जाहू ना निज ...
अहिंसा परमो धर्मः ,हिंसा आपद धर्मः ।
सीतहि सभय देखी रघुराई ! कहा अनुज सन सयन बुझाई॥
जो ढोवत अस भार, सो किमी झोंकत भार अस,रहिमन उतरे ...
जे सुलगे ते बुझि गए, बुझे ते सुलगे नाहिं,रहिमन द...
कहो रहीम कहाँ सीखी ,ऐसी उलटी बैन,ज्यूँ ज्यूँ...
जोड़ ले हाथों से हाथ एक दूजे से कस कर , के यारों ...
अब रहीम मुश्किल पड़ी ,गाढे दोउ काम,सांच कहें तो ...
अहो निरंजनः शान्तो बोधोहम प्रक्रितेह परः । एतावंत्...
अक्ल की सतह से कुछ ओर गुज़र जाना था, इश्क को मंजिल...
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Omendra Ratnu
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