दैर- ओ -हरम भी मंजिल-ए-जानां में आये थे, शुक्र है बढ़ गए अपना दामन बचा के हम !
मन्दिर और मस्जिद भी परमात्मा की खोज के रास्ते में आये थे। पर धन्यवाद हे प्रभु ! उन सब के पागलपन से बच के हम आगे निकल गए !
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