Monday, May 17, 2010

महाभारत से एक बोध कथा। एक पंडित और उसका मित्र एक साधु से मिलने गए। पंडित अपने ज्ञान के अहंकार से भरा था । उसने साधु को प्रणाम किया और पूछा , ' महाराज , मुझे मोक्ष कब मिलेगा ? " साधु बोले- ३ जन्मों के बाद। पंडित उदास हो गया । पंडित के मित्र ने भी डरते डरते पूछा- और महाराज मुझे? साधु एक पीपल के पेड़ के नीचे बैठ थे। साधु बोले- जितने पत्ते इस पीपल की शाखाओं पे लगे हैं ,उतने जन्मों के बाद। वह व्यक्ति नाचने लगा । पंडित और साधु ने उस से पूछा, तुम निराश नहीं हो? अभी तुम्हारा मोक्ष कितना दूर है ! उस व्यक्ति ने कहा, मैं आनंदित हूँ कि मुझे मोक्ष मिलेगा। मेरी पात्रता कहाँ थी , यह तो परमात्मा की असीम अनुकम्पा है कि बस इतने से जन्मों के बाद मुझ जैसे को भी मोक्ष मिलेगा। उसी क्षण आकाशवाणी हुई - वत्स, तुझे इसी क्षण मोक्ष मिलता है। तू आज से , अब से मुक्त है।

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