हंसा विरद सम्हाल ले, चुगे तो मोती चुग्ग , नितर करना लंघना , जीणों कितेक जुग्ग ।
हे हंसा, अपने स्वरुप को सम्हाल, भूख लगने पर केवल मोती चुनना , नहीं तो भूखे मरना अच्छा, अंततः तू कोई युगों तक तो जीने आया नहीं।
No comments:
Post a Comment