Saturday, June 19, 2010

रस्मो-रिवाज वो निभाएं जिन्हें गरज हो दुनिया वालों से,
ना रुसवाई का कोई डर था ना था खौफ पशेमान होने से ,
खुद को मिटाने की कसम पे चले हैं वफ़ा के दीवाने ,
आजमाना हो खुद को तो खोलते हैं हम सफीना , या फिर,
बस दामन बचा के निकल जा जुनूं के सैलाब वालों से।

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