यदा नाहं तदा मोक्षो यदाहम बन्धनं तदा ।
मत्वेति हेलया किन्चिनमा गृहाण विमुंच माँ ॥
जब मैं हूँ तब बन्ध है, जब मैं नहीं हूँ मोक्ष है , इसी प्रकार मान कर ,इच्छा कर, ना तो ग्रहण कर और ना त्याग कर ! - अष्टावक्र के वचन जनक को।
Sunday, June 27, 2010
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