Saturday, July 31, 2010

जैसे गुरु नानक कहते हैं ..जहां मिले पीव से प्यारी, वहाँ कौन पुरुष कौन नारी ? ना प्रेमी बचा ना प्रेमिका...बचा केवल शुद्ध प्रेम !

Thursday, July 29, 2010

नहि सुप्तस्य सिंघस्य प्रविश्यन्ति मुखे मृगः ॥
जब मैं था तब हरि नहीं ,अब हरि है मैं नाहीं।
सब अँधियारा मिट गया ,जब दीपक देखा माहीं ॥

Sunday, July 25, 2010

मोक्ष का अर्थ मेरी मुक्ति नहीं, बल्कि ' मैं' से मुक्ति है !

प्रीत पुराणी ना पड़े ,जो सज्जन सू लग्ग।

क्रोंर बरस जल में रहे तोई पथरी तजे ना अग्ग॥

मिलनों भलो ना बिछरनो तज दोंयाँरो संग।

बिछरता मछली मरी, मिलता मरयो पतंग ॥

Friday, July 23, 2010

हानि लाभ, जीवन मरण ,यश अपयश विधि हाथ ॥

Wednesday, July 21, 2010

लालायित अधरों से जिसने हाय नहीं चूमी हाला, हर्षित कम्पित कर से जिसने हा ना छुआ मधु का प्याला,
हाथ पकड़ लज्जित साकी का पास नहीं जिसने खींचा, व्यर्थ सुखा डाली जीवन की उसने मधुमय मधुशाला॥

Monday, July 19, 2010

प्रेम इतनी सशक्त घटना है कि उसका भ्रम भी उपयोगी हो सकता है, संसार इतनी निरर्थक घटना है कि उसका सत्य होना भी निरर्थक है।
हंसीबा खेलीबा धरीबा ध्यानम ! हंसो, खेलो और ध्यान करो !

Sunday, July 18, 2010

हम जिसे छू ना सकें उसको खुदा कहते हैं !
हम जिसे छू ना सकें उसको खुदा कहते हैं !
कहाँ मेरा शौक-ए-नज्ज़ारा , कहाँ ये देहर कौना ,
कोई दुनिया नई होती, कोई आलम नया होता !

Saturday, July 17, 2010

यह जीवन एक लीला है लाला ! अस्तित्व का खेल ! काहे को इतना सर पटक रहे हो ? मजे करो और बेचारे परमात्मा को भी मजे करने दो ! क्यूँ नाहक परेशान हो रहे हो?
पानी में मीन पियासी , मोहे सुन सुन आवे हांसी रे.....शुभमस्तु !
स्वान्तः सुखाय तुलसी रघुनाथ गाथाः । किसी को राजी करने के लिए नहीं, किसी प्रयोजन से नहीं ! केवल , और केवल अपने आनंद के लिए मैंने प्रभु राम की गाथा गयी है।
रहिमन याचकता गहें , बड़े छोट व्हे जात।
नारायण हूँ को भयो, बावन आंगुर गात॥

Friday, July 16, 2010

हम जानते क्या हैं अस्तित्व के प्रयोजन के बारे में कि हम परमात्मा से मांगने बैठ जाते हैं ? जिस अस्तित्व से जीवन पाया है, चैतन्य मिला है, सोच मिली है, समझ मिली है, उस से और की मांग करना हद दर्जे की कृतघ्नता है।

Thursday, July 15, 2010

निःशब्द के अनुभव को शब्द देने का प्रयत्न ,अपने आप में ही भागीरथ प्रयास है। उस पे इतनी सशक्त कविता ! आप भाग्यशाली हैं दादा कि अस्तित्व अपने पूरे वेग से आप पर उतर रहा है। हमारा सौभाग्य है कि इस अवतरण के हम भी साक्षी हैं !

Friday, July 9, 2010

तत त्वम् असि श्वेतकेतु !
कहाँ हम कहाँ वो, कहाँ बेहिजाबी, कहाँ राज़दारी , येह हुस्न-ओ-मोहोब्बत ,
कहाँ अपनी नज़रें , कहाँ उनके जलवे , यह उनकी इनायत नहीं है तो क्या है ?
सब लुट गया तो क्या, तू अब भी है,
अँधेरी रातों में तेरी महक अब भी है !
टूटती नहीं यह खुमारी क्या करें,
मेरे वजूद में घुली मिली, तू अब भी है !
जानता हूँ खूब नज़र फिर गयी तेरी,
दिल की तनहाइयों में, तू अब भी है !
तेरे होने, ना होने से फर्क नहीं कोई,
इस आशिकी के जुनूं में ,तू अब भी है !
दौर-ए-हिज्र में हालांकि हुए घायल,
एहसास-ए-शुक्रमंदी में, तू अब भी है !
तिजारत की दुनिया रखे हिसाब तेरा,
इश्क में आज़ाद तू तब भी थी , तू अब भी है !

Thursday, July 8, 2010

ज़ख्म को फूल, सर-सर को सबा कहते हैं ,

जाने क्या लोग हैं, क्या दौर है, क्या कहते हैं !

Tuesday, July 6, 2010

अश्रद्धा में लाभ हो जाये तो भी दो कौड़ी का है, क्यूंकि अश्रद्धा हमें कृपण बना कर जाएगी। श्रद्धा में हानि भी हो जाये तो हानि नहीं है, क्यूंकि हमने श्रद्धा की, तो हम रूपांतरित हो जायेंगे। कबीर तो कहते ही हैं ... सहज मिले अविनाशी ... पानी में मीन पियासी, मोहे सुन सुन आवे हांसी।
The happiness of a man is "I will". The happiness of a woman is , "He will'.
आम आदमी को सत्य समझ में नहीं आता, स्वार्थ समझ में आता है।

Friday, July 2, 2010

आसमां की खिड़की में एक चेहरा देखता हूँ ,
हर अंगो-अक्स तेरा नूर में घुलते देखता हूँ ,
गिर चुका है धूल में हर मुखौटा मेरा ,
हर आईने में तेरा ही नूर सुनहरा देखता हूँ ।