लालायित अधरों से जिसने हाय नहीं चूमी हाला, हर्षित कम्पित कर से जिसने हा ना छुआ मधु का प्याला,
हाथ पकड़ लज्जित साकी का पास नहीं जिसने खींचा, व्यर्थ सुखा डाली जीवन की उसने मधुमय मधुशाला॥
Wednesday, July 21, 2010
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