Saturday, July 17, 2010

स्वान्तः सुखाय तुलसी रघुनाथ गाथाः । किसी को राजी करने के लिए नहीं, किसी प्रयोजन से नहीं ! केवल , और केवल अपने आनंद के लिए मैंने प्रभु राम की गाथा गयी है।

No comments:

Post a Comment