Friday, July 9, 2010

सब लुट गया तो क्या, तू अब भी है,
अँधेरी रातों में तेरी महक अब भी है !
टूटती नहीं यह खुमारी क्या करें,
मेरे वजूद में घुली मिली, तू अब भी है !
जानता हूँ खूब नज़र फिर गयी तेरी,
दिल की तनहाइयों में, तू अब भी है !
तेरे होने, ना होने से फर्क नहीं कोई,
इस आशिकी के जुनूं में ,तू अब भी है !
दौर-ए-हिज्र में हालांकि हुए घायल,
एहसास-ए-शुक्रमंदी में, तू अब भी है !
तिजारत की दुनिया रखे हिसाब तेरा,
इश्क में आज़ाद तू तब भी थी , तू अब भी है !

1 comment:

  1. यह मेरा सौभाग्य है कि मैं आपके ब्लाग का follower बना हूँ....आपकी लिखी बेहतरीन रचनाएं कभी भी पढ़ सकता हूँ....शुक्रिया..

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