Thursday, July 15, 2010

निःशब्द के अनुभव को शब्द देने का प्रयत्न ,अपने आप में ही भागीरथ प्रयास है। उस पे इतनी सशक्त कविता ! आप भाग्यशाली हैं दादा कि अस्तित्व अपने पूरे वेग से आप पर उतर रहा है। हमारा सौभाग्य है कि इस अवतरण के हम भी साक्षी हैं !

No comments:

Post a Comment