Friday, July 2, 2010

आसमां की खिड़की में एक चेहरा देखता हूँ ,
हर अंगो-अक्स तेरा नूर में घुलते देखता हूँ ,
गिर चुका है धूल में हर मुखौटा मेरा ,
हर आईने में तेरा ही नूर सुनहरा देखता हूँ ।

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