यह जीवन एक लीला है लाला ! अस्तित्व का खेल ! काहे को इतना सर पटक रहे हो ? मजे करो और बेचारे परमात्मा को भी मजे करने दो ! क्यूँ नाहक परेशान हो रहे हो?
पानी में मीन पियासी , मोहे सुन सुन आवे हांसी रे.....शुभमस्तु !
Saturday, July 17, 2010
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