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India and the inner quest
Sunday, July 25, 2010
मोक्ष का अर्थ मेरी मुक्ति नहीं, बल्कि ' मैं' से मुक्ति है !
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जैसे गुरु नानक कहते हैं ..जहां मिले पीव से प्यारी,...
नहि सुप्तस्य सिंघस्य प्रविश्यन्ति मुखे मृगः ॥
जब मैं था तब हरि नहीं ,अब हरि है मैं नाहीं।सब...
मोक्ष का अर्थ मेरी मुक्ति नहीं, बल्कि ' मैं' से म...
प्रीत पुराणी ना पड़े ,जो सज्जन सू लग्ग। क्रोंर बरस ...
मिलनों भलो ना बिछरनो तज दोंयाँरो संग। बिछरता मछली ...
हानि लाभ, जीवन मरण ,यश अपयश विधि हाथ ॥
लालायित अधरों से जिसने हाय नहीं चूमी हाला, हर्षित...
प्रेम इतनी सशक्त घटना है कि उसका भ्रम भी उपयोगी हो...
हंसीबा खेलीबा धरीबा ध्यानम ! हंसो, खेलो और ध्यान क...
हम जिसे छू ना सकें उसको खुदा कहते हैं !
हम जिसे छू ना सकें उसको खुदा कहते हैं !
कहाँ मेरा शौक-ए-नज्ज़ारा , कहाँ ये देहर कौना ,कोई ...
यह जीवन एक लीला है लाला ! अस्तित्व का खेल ! काहे ...
स्वान्तः सुखाय तुलसी रघुनाथ गाथाः । किसी को राजी क...
रहिमन याचकता गहें , बड़े छोट व्हे जात।नारायण हूँ ...
हम जानते क्या हैं अस्तित्व के प्रयोजन के बारे में ...
निःशब्द के अनुभव को शब्द देने का प्रयत्न ,अपने आप...
तत त्वम् असि श्वेतकेतु !
कहाँ हम कहाँ वो, कहाँ बेहिजाबी, कहाँ राज़दारी , ये...
सब लुट गया तो क्या, तू अब भी है,अँधेरी रातों में त...
ज़ख्म को फूल, सर-सर को सबा कहते हैं ,जाने क्या ...
अश्रद्धा में लाभ हो जाये तो भी दो कौड़ी का है, क्यू...
The happiness of a man is "I will". The happiness ...
आम आदमी को सत्य समझ में नहीं आता, स्वार्थ समझ में ...
आसमां की खिड़की में एक चेहरा देखता हूँ ,हर अंगो-अक...
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