Wednesday, September 22, 2010

ध्यायतो विषयान्पुंसः संग्शूप्जायते। संगात्संजायते कामः कामात्क्रोधोभिजायते ॥
विषयों का चिंतन करने वाले पुरुष की उन विषयोंमें आसक्ति हो जाती है। आसक्ति से उन विषयों की कामना उत्पन्न होती है । और कामना में विघ्न पड़ने से क्रोध आता है ।
क्रोधाद्भावती सम्मोहः सम्मोहात्स्म्रितिविभ्रमः । स्मृतिभ्रंशाद बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात प्रनश्यती
क्रोध से अत्यंत मूढ़ भाव उत्पन्न होता है, मूढ्भाव से स्मृति भ्रम में पड़ जाती है, स्मृति के भ्रमित होने बुद्धि का नाश होता है , और बुद्धि का नाश होने से पुरुष अपनी स्थिति से गिर जाता है ।

No comments:

Post a Comment