Thursday, September 23, 2010

अंत में तोः खुदा और भगवान् एक ही सत्ता का नाम है ... पर हम अभी अंत में पोहोंचे नहीं है ! जहां हम खड़े हैं वहाँ चाहे मार्ग का ही सही, पर भेद है.... सभी मार्ग सुन्दर हैं... शुभ हैं... तुम्हें तुम्हारा मार्ग मुबारक... मुझे मेरा... जब मंजिल पे मिलेंगे तब देखी जाएगी... यह संसार सुन्दर ही इसलिए है कि यहाँ अलग अलग किस्म के फूल खिले हैं... हिन्दू अपनी खुशबू बिखेरे, इस्लाम अपनी, इसाईयत अपनी..... तुम्हारी भी जय जय , हमारी भी जय जय ! पर जब तक हम इस भेद की दुनिया में जी रहे हैं ... एक दुसरे का सम्मान ही खुशहाली का मार्ग है ! कोई किसी को नीचा ना दिखाए.... वरना हम यहीं लड़ मर के नष्ट हो जायेंगे ! ना खुदा ही मिला , ना विसाले सनम ! ना इधर के रहे ना उधर के रहे !

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