ईंट को बंधन, चेरी को नन्दन, नीम को चन्दन, वाम को घूंसा !
मेहता की आन, ढफाली की तान, ठठेरी को चौसा !
रंक की खीज, मूंजी की रीझ, कपूत को रोसा !
राजा को दूसरो, छयाली को तीसरो, इरंड को मूसल , खासम खूसा !
Thursday, September 16, 2010
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